माया (भ्रम) हर इंसान माया और मोह में फँसा हुआ है। यह माया उसे धोखा देती रहती है और वह दुखी बना रहता है।
. लालच लालच के कारण इंसान सही रास्ते से दूर हो जाता है। ज्ञान, ध्यान और समझ भी उसके सामने बेबस हो जाते हैं।
. माया की गुलामी पता ही नहीं चला कि कब हम माया के अधीन हो गए। आज हम सब परेशान और कमजोर महसूस कर रहे हैं।
. महँगाई महँगाई से आम जनता बहुत दुखी है। लोग दिन-रात चिंता में डूबे रहते हैं और नई-नई परेशानियों का सामना करते हैं।
किसानों की समस्या महँगाई के समय में भी किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिलता। खेती करना और भी कठिन होता जा रहा है।
. गंगा और अहंकार हम गंगा जी की महिमा तो गाते हैं, लेकिन अपने अहंकार में इतने डूब गए हैं कि उनकी पवित्रता का सही सम्मान नहीं करते।
. महँगाई का असर महँगाई लगातार बढ़ रही है और लोगों का जीवन मुश्किल बनाती जा रही है।
. दहेज प्रथा दहेज की वजह से बेटियों का विवाह करना कठिन हो गया है। समाज में दहेज की बुरी प्रथा अभी भी मौजूद है।
पैसे का लालच आज सब कुछ पैसे के इर्द-गिर्द घूमता है। दहेज जैसी बुराइयों की जड़ भी पैसों का लालच ही है।
उम्मीद कवि कहता है कि उसे अब खुद पर भी पूरा भरोसा नहीं रहा, लेकिन ईश्वर से अभी भी आशा बाकी है।
दिखावा आज लोग इंसानियत से ज्यादा पद, पैसा और पहचान को महत्व देते हैं
विज्ञान और मानसिकता विज्ञान में तरक्की के बावजूद इंसान कई मानसिक समस्याओं और कुंठाओं से घिरा हुआ है।
हिंसा और भोगवाद पर व्यंग्य कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि आज का समाज सोच-विचार छोड़कर केवल मौज-मस्ती और स्वार्थ में डूबता जा रहा है।
यह कविता माया, लालच, महँगाई, दहेज, अहंकार और समाज की बदलती सोच जैसी समस्याओं पर प्रकाश डालती है और इंसान को आत्मचिंतन करने का संदेश देती है।