English Quote in Questions by Praveen Kumrawat

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दरवाजा खुला था पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी।

एक व्यक्ति अपने गमले के पौधे में रोज पानी देता था। समय पर खाद भी देता था। मगर वह पानी में थोड़ा सा जहर मिला देता था। पौधा बहुत खुश था कि उसकी बहुत अच्छे से देखभाल की जा रही है। मगर इस सबके बावजूद पौधा मुरझा रहा था। उसने मालिक से पूछा “मै मुरझा क्यों रहा हूं?” मालिक बोला “मै तो खाद और पानी समय पर दे रहा हूं। कमी तुम्हारे अंदर है। तुम्हारी जड़े ही कमजोर है।” एक दिन पौधा मर कर शांत पड़ गया। वह आखरी समय तक खुद को कोसता रहा कि मुझमें ही कमियां है।

ज़िंदगी में भी कुछ लोग ऐसे ही होते हैं। जो हमे बाहरी तौर पर हेल्प तो करते है पर हमारी कमियां गिना गिना कर मानसिक रूप से हमे तोड़ते भी है। ऐसे लोग एक धीमे जहर की तरह होते है। जिनका जहर दिखता नही है मगर धीरे धीरे हमारी आत्मा को घायल करता है और एक दिन खत्म कर देता हैं। मैं उसी घायल आत्मा और टूटते आत्मसम्मान की कहानी लिख रहा हूँ।

यह कहानी एक ऐसे लड़के की है जिसे अपनों ने ही निकम्मा मान लिया, और धीरे-धीरे उसने खुद को भी उसी नजर से देखना शुरू कर दिया। अगर इस दर्द को महसूस करना चाहते हैं, तो मेरी प्रोफाइल पर आपका स्वागत है। 🙏✨
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English Questions by Praveen Kumrawat : 112026126
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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