दरवाजा खुला था पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी।
एक व्यक्ति अपने गमले के पौधे में रोज पानी देता था। समय पर खाद भी देता था। मगर वह पानी में थोड़ा सा जहर मिला देता था। पौधा बहुत खुश था कि उसकी बहुत अच्छे से देखभाल की जा रही है। मगर इस सबके बावजूद पौधा मुरझा रहा था। उसने मालिक से पूछा “मै मुरझा क्यों रहा हूं?” मालिक बोला “मै तो खाद और पानी समय पर दे रहा हूं। कमी तुम्हारे अंदर है। तुम्हारी जड़े ही कमजोर है।” एक दिन पौधा मर कर शांत पड़ गया। वह आखरी समय तक खुद को कोसता रहा कि मुझमें ही कमियां है।
ज़िंदगी में भी कुछ लोग ऐसे ही होते हैं। जो हमे बाहरी तौर पर हेल्प तो करते है पर हमारी कमियां गिना गिना कर मानसिक रूप से हमे तोड़ते भी है। ऐसे लोग एक धीमे जहर की तरह होते है। जिनका जहर दिखता नही है मगर धीरे धीरे हमारी आत्मा को घायल करता है और एक दिन खत्म कर देता हैं। मैं उसी घायल आत्मा और टूटते आत्मसम्मान की कहानी लिख रहा हूँ।
यह कहानी एक ऐसे लड़के की है जिसे अपनों ने ही निकम्मा मान लिया, और धीरे-धीरे उसने खुद को भी उसी नजर से देखना शुरू कर दिया। अगर इस दर्द को महसूस करना चाहते हैं, तो मेरी प्रोफाइल पर आपका स्वागत है। 🙏✨
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