शीर्षक - "अभिलाषा"
ऐ सुनो,
मुझे इतना नज़रअंदाज़ क्यों करती हो?
तीन बार बुलाता हूँ,
कम से कम एक बार आवाज़ तो दो...
बोल नहीं सकती,
इशारा तो कर सकती हो।
इशारा नहीं कर सकती,
सिर तो हिला सकती हो।
मानता हूँ कि तुम नफ़रत करती हो,
नफ़रत ही सही,
पर प्यार भी तो जता सकती हो।
यह भी नहीं कर सकती,
तो मेरी राह में काँटे ही बिछा सकती हो...
काँटे नहीं,
तो फूल भी बिछा सकती हो...
दूसरों को आवाज़ देता हूँ,
यूँ ही चिढ़ जाती हो।
तुम्हें आवाज़ देता हूँ,
फिर क्यों मुँह फेर लेती हो?
मुझे जब हिचकी आती,
यूँ ही नीर ले आती हो।
फिर क्यों नहीं मुझे,
नीर में ज़हर की पुड़िया घोल कर दे देती हो?
-एस.टी.डी.
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कटनी मध्य प्रदेश
#stdmaurya