मैं और मेरे अह्सास
तन्हाई
तन्हाई की ये दास्ताँ क्या हैं?
जीस्त क्या है? जाँ क्या हैं?
क्यूँ जुदा हो गये हो कि l
तेरे मेरे दरमियाँ क्या हैं?
सिर्फ़ एक बार फिर से l
मिलन का झरियाँ क्या हैं?
ऐसे ना किया करो के l
पता है, बागयाँ क्या हैं?
गर हौसला बुलन्द हो तो l
उड़ान को आसमाँ क्या हैं?
२५-४-२०२६
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह