कुछ जोकर ऐसे भी होते हैं,
जो हँसते तो दूसरों पर हैं,
पर हँसी के पात्र स्वयं बन जाते हैं।
जोकर होना भी आसान कहाँ है!
जिसमें साहस हो स्वयं पर हँसने का
और दूसरों का मन बहलाने का,
वही असली जोकर कहलाता है।
तुम जो खेल खेलते हो दूसरों पर,
उसे हम हर रोज़ स्वयं पर खेलते हैं।
फर्क बस इतना है कि
अब तक वह समय किसी के हाथ नहीं आया
जो हमारे संघर्ष को चुनौती दे सके।
माना, छोटी-छोटी ऊँचाइयों पर पहुँचकर
अहंकार आ ही जाता है,
पर याद रखना—
विशाल वृक्ष हमेशा झुका ही रहता है,
और उसी में उसकी महानता होती है।
— अनंत धीश अमन