प्रेम करना तो ऐसा करना जैसे रेत करती है सागर से, पानी करता है गागर से, आसमान करता है नक्षत्रों से, योद्धा करता है शस्त्रों से, पलकें करती हैं आँखों से, अघोरी करता है राखों से, कांजी करती है धूप से, विश्व-सुंदरी करती है अपने रूप से, कामुक करता है तन से, लोभी करता है धन से, प्रेम करना तो ऐसा करना वर्ना मत ही करना,
तुम्हारे बचपन की पसंदीदा किताब की तरह सहेज के रखना, जब-जब मुझे देखो चेहरे पर मुस्कान रखना,
प्रेम करना तो ऐसा करना वर्ना मत ही करना, क्योंकि क्या है ना, इंद्र जैसा प्रेम करने वाले बहुत हैं, वादा रहा मैं पार्वती जैसा प्रेम करूँगी, पर तुम और मैं मिलकर अर्धनारीश्वर बन जाये ऐसा प्रेम कर सको तो करना वर्ना मत ही करना।