अगर तुम मेरे होते तो क्या बात होती ? (अनकही आरज़ू)
अगर तुम मेरे होते तो क्या बात होती
करती इतनी मोहब्बत तुमसे देख दुनिया भी हैरान होती,बिठाती तुम्हे पलकों पर मेरी मोहब्बत देख कुदरत को भी जलन होती
अगर तुम मेरे होते तो क्या बात होती 🙂
Annu लुटाती अपनी आबरू फिर दुनिया तेरी तलबगार होती,अगर तुम मेरे होते क्या बात होती ।
अगर तुम साथ होते तो तुझे ख़ुदा की रहमत कहती मैं, अपनी जिंदगी जहमत न कहती मैं,
मैंने तुमसे की इतनी मोहब्बत काश तुम भी कर लेते तो क्या बात थी
हम भी अपने मुकद्दर पे नाज़ करते
अगर तुम मेरे होते,
यूं ताकती ना फिर तेरे जैसे दिखने वालों को मैं
यूं ना पागल होती,
मेरा अपना भी एक मयार होता
तुम मेरे होते तो क्या बात होती!
तुझे रांझा तो खुद हीर बोल देती मैं
अगर तुम होते तो कसम रूह की
इक पल में सारा ज़माना छोड़ देती मैं!
अपनी कहानी में तुम्हे गुनाहगार न लिखती मैं,
अगर राज़ी होता तू मुझसे तो सरे आम मोहब्बत का ऐलान करती मैं ।"
अगर तुम मेरे होते तो क्या क्या न करती मैं
मोहब्बत में इस दुनिया ने जाने दी है अपने लिए
मैं तुम्हारे लिए सारी दुनिया को मात देती मैं
मैंने मांगा था तुझे हर मस्जिद,मंदिर,गिरिजाघर, गुरुद्वारे में, काश तुम मुझे मेरे बाप से ही मांग लेते तो क्या बात थी!
मैंने छोड़ी है तेरी खातिर ख्वाहिशें सारी काश तू भी अपनी आदत छोड़ पाता !
मैं तेरे मुस्कुराने को मोहब्बत समझती थी
तू मेरे दिल का हाल जान पाता तो क्या बात थी?? 🫠🖤