बेटियां
होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।
माथे पे आँचल, हाथों में मेहंदी रची,
हल्दी के रंग में आज रंगी है वो गुड़िया।
लोरियों में पली, सपनों में ढली,
आज किसी और के घर की है वो धूपिया।
होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।
माँ की दुआ बन हर साँस में बहती है,
पापा की उम्मीद पलकों में चमकती है।
भाई-बहन, सखियों की हँसी साथ लिए,
हर रिश्ते में वो अपनी खुशबू बिखेरती है।
होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।
वो जा तो रही है, पर दूर नहीं हो रही ,
दो घरों की रौशनी बन दो आँगनों में चमक रही है।
एक घर की धड़कन, दूजे की सुबह,
हर दिल के आसमान में अपनी जगह लालिमा सी बिखेर रही है।
होगा ये घर कल उदास,
पर आज इस घर के हर कोने में अंजोरिया सी पसर रही है।
होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।
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