रहने दो अब…
तुम मुझे पढ़ नहीं पाओगी,
मैं बारिश में गलता हुआ
एक आख़िरी कागज़ हूँ…
जिस पर लिखी हर पंक्ति
भीगकर धुँधली हो चुकी है,
अब तो मेरा नाम भी
पहचान में नहीं आता…
तुम समझती तो बहुत कुछ थी,
पर अब समझने को
कुछ बचा ही कहाँ है…
मैं पूरा का पूरा
बरसात में घुल चुका हूँ।
@beyond_word✍️