*आम आदमी के कवि हैं गोलेन्द्र पटेल*
गोलेन्द्र पटेल वर्तमान समय के महत्त्वपूर्ण युवा कवि-लेखक हैं। उनकी कविताओं में पीड़ा प्रबोधन की लय और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है। व्यवस्था, जिसने जनता को छला है, उसको आइना दिखाना मानों गोलेन्द्र पटेल की कविताओं का परम लक्ष्य है। वे आम आदमी के साहित्यकार हैं। कालजयी रचनाकार के रूप में सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे निरंतर संघर्षरत हैं। उनकी रचनाएं सम्यक सांस्कृतिक रूप से दरिद्र हो रहे समाज के लिए चेतावनी हैं। गोलेन्द्र पटेल ने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज की समस्याओं, विशेषकर किसानों, गरीबों, दलितों , स्त्रियों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और निम्न वर्ग की दुर्दशा को उजागर कर रहे हैं। उनकी रचनाएं समाज के शोषित, दलित और मेहनतकश वर्ग की आवाज़ हैं। वे ऐसे युवा साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए समाज में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया है, कर रहे हैं। गोलेन्द्र पटेल की रचनाऍं समाज, राजनीति, संस्कृति और व्यवस्था पर एक क्रिटीक की तरह हैं, क्योंकि सच्चा कवि व्यवस्था का पोषक नहीं, आलोचक होता है। वह सहमतियों का गान नहीं लिखता, असहमतियों की साखी रचता है। इस अर्थ में असहमतियों की साखी रचने वाले कवि हैं गोलेन्द्र पटेल।
गोलेन्द्र पटेल अपनी कविताओं के माध्यम से उन तमाम शोषितों और वंचितों को आवाज़ देते हैं। उनकी कविताओं में आक्रामकता है, व्यवस्था का विरोध है। गोलेन्द्र पटेल अपनी रचनाओं में एक ऐसी काव्य भाषा की इजाद करते हैं, जो अंधी काव्य-भाषा की रुमानियत और अतिशय कल्पनाशीलता से मुक्त है। उनकी भाषा सहज और सरल है। गोलेन्द्र पटेल जी का व्यक्तित्व बेहद सरल और छल-कपट से दूर है। यही सहजता उनकी रचनाओं में झलकती है। जिसके बल पर वे जन-जन के मन में जगह बना रहे हैं। गाँव की असली संस्कृति गोलेन्द्र पटेल की कविताओं में दिखती है। गोलेन्द्र जी अपनी रचनाओं से जनचेतना को जागृत कर रहे हैं। गोलेन्द्र जी की भाषा हिंदी कविता की बनी बनाई परंपरा से अलग है। वे कविता की दुनिया में भाषा का भ्रम तोड़ते हैं। वे जनता की यातना और दुःख से उभरी तेजस्वी भाषा में कविताएं करना पसंद करते हैं। गोलेन्द्र की कविताओं का विषय ज्यादातर राजनीति, राजनेता, जाति-धर्म के ठेकेदार रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि देश में व्याप्त ज्यादातर मानवजनित समस्याओं का कारण राजनीतिक और सामाजिक संकीर्णताएं हैं। उनकी लेखनी ने न केवल साहित्य को समृद्ध कर रहा है, बल्कि समाज को जागरूक करने का काम भी कर रहा है। गोलेन्द्र पटेल की रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी और उनकी रचनाधर्मिता अनमोल धरोहर के रूप में सदैव याद की जाएंगी एक न एक दिन।
गोलेन्द्र पटेल की रचना के केंद्र में सबसे अधिक शोषित-पीड़ित, स्त्री एवं दलित-वंचित हैं, क्योंकि उनकी रचनाएं मानव जीवन के सच को उजागर करती हैं। गोलेन्द्र पटेल की कविताओं में समाज के प्रतिबिंब हैं। वे समाज के अंतर्मन को झकझोरेने वाले कवि हैं, वे समाज की नब्ज समझने वाले कवि हैं। उनकी संवेदना आम आदमी के साथ जुड़ी है। उनकी कविताओं में उनके गाँव जवार के लोग, गवईं बिम्ब, प्रतीक देखने को मिलता है। उनकी रचनाएं सामाजिक मूल्यों को दर्शाती रही हैं, उन्होंने समाज के हर वर्ग को अपने शब्दों में शामिल किया है और उनके हलफ़नामे को अपनी रचना के रूप में समाज के सामने रख रहे हैं। गोलेन्द्र पटेल की कविताओं में भारत का सच्चा समाज बोलता है। गोलेन्द्र समतामूलक समाज निर्माण के प्रबल समर्थक हैं। गोलेन्द्र की वैश्विक क्रांतिधर्मी चेतना में सार्वभौमिक सृजनात्मक दृष्टि है।