Hindi Quote in Poem by Asmita Madhesiya

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याद आ गया वो पल ,
याद आ गया वो पल,
था वो भी कभी आज,
जो अब बन गया है कल,
फिर क्या ?
कुछ खास नहीं,
हां कुछ खास नहीं,
याद आया ,
रक्खा क्या है उस पल में,
क्या कभी कोई सुखी रह पाया है,
क्या कभी कोई सुखी रह पाया है,
बीते हुए कल में,
अरे जीना है,
अरे जीना है,
तो जीओ हर पल में,
क्या रखा है कल में,
जो बीत गया उसकी यादें,
कहीं कभी किसी से की हुई ,
कही कभी किसी से की हुई,
कसमें और वादें,
कुछ पूरी हुई होगी,
कुछ अधूरी रह गई होगी,
किसी से कही हुई बातें,
किसी के द्वारा कही हुई बातें,
जो बीत गया उसकी यादें,
मन को झकझोर देने वाली बातें,
घर के कोने कोने में बसी कुछ यादें,
दिल दिमाग में छाई ,
कुछ परछाई ,
रातों की नींद ,
सुबह की रौनक ,
उसकी ऐनक,
चादर की सिलवट,
तुहारी करवट,
तकिए का खोल,
कुछ प्यार भरे मीठे बोल,
मन को गुदगुदाने वाली बातें ,
खूबसूरत रातें ,
आंखों की नमी ,
जीवन का सार,
बढ़ता गया ,
गाड़ी चलती गई ,
बात बदलती गई,
भावनाए बढ़ते गए,
आपस में लड़े भी ,
झगड़े भी ,
परिवार भी बढ़ा ,
रिश्ता रिश्तों की सीढ़ी चढ़ा,
अंश आया ,
पदवी बढ़ी,
सदस्य बढ़ा ,
आपस में प्रेम की लहर दौड़ी ,
आंखें नम हो गई,
याद आ गया वो पल ,
याद आ गया वो पल,
था वो भी कभी आज ,
जो बन गया कल,
फिर क्या ?
कुछ खास नहीं,
वाकई रक्खा नहीं कुछ उस पल में,
एक बार शुरू हो जाए ,
एक बार शुरू हो जाए ,
तो दिल उसी वक्त में खो जाए,
मन कही चला जाए ,
तन यही रह जाए ,
आज को भूल जाए ,
कल में डूब जाए ,
आज की खुशी से वंचित कर ले ,
अपने आप को चिंतित कर ले ,
जो कभी खराब न होना था ,
वो भी खराब कर जाए ,
ऐसा नशा है कल में,
जो डूबा दे उसी पल में,
हां कुछ खास नहीं याद आया ,
शायद जीवन का कुछ हिस्सा ,
शायद जीवन का कुछ हिस्सा ,
रक्खा है उस पल में,
हो भी क्यों न,
सदियां गुजरी,
जाने कितनी सर्दियां गुजरी,
बांहों में बांहे डाले यूहीं घूमा करते थे ,
पुराने गीतों पर,
खून झूमा करते थे ,
रिश्तों के बढ़ते ही उनकी देख भाल में लग गए ,
कुछ सुलझे रिश्ते उलझ गए ,
कुछ उलझे रिश्ते सुलझ गए ,
रिश्तों के बढ़ते ही उनके देख भाल में लग गए,
समय भी अपने रफ्तार से चलने लगा,
काले बाल भी साथ छोड़,
अपने रंग बदलने में लग गए,
शरीर भी अब पहले सा न रहा ,
कुछ खालीपन सा लगने लगा ,
याद आया जीना है तो जीओ हर पल में,
क्या रक्खा है कल में,
कुछ खालीपन सा लगने लगा ,
मन का विश्वास ,
आत्म विश्वाश बन कर झलकने लगा ,
क्या रक्खा है कल में,
जीओ हर पल में।।

Hindi Poem by Asmita Madhesiya : 112018733

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