"मैं क्या लिखूँ?
खुद को नवाब लिखूँ या खुद को फ़कीर लिखूँ?
नवाब लिखता हूँ, तो फ़कीर छूट जाता है,
फ़कीर लिखता हूँ, तो नवाब छूट जाता है।
हसीना की सूरत देखूँ, तो अपनी सूरत भूल जाता हूँ,
तुम अपने लफ्ज़ों से बयां तो करो—
अपनी स्याही से खुद को नवाब लिखूँ या फ़कीर लिखूँ?
कदम-कदम चलकर मैं यहाँ तक आया हूँ,
मैं सोचता हूँ... तुम अपने लफ्ज़ों से बयां करो,
गर तुम बयां नहीं करते, तो मैं खुद को फ़कीर ही लिखता हूँ।"
- सत्येंद्र कुमार "एसटीडी"
कटनी, मध्य प्रदेश
दूरभाष -7648959825