उसके चक्कर में ज़माना भूल गए,
उसके बाद मुस्कुराना भूल गए।
जब सफलता कदमों में थी हमारे,
उसी मोड़ पर वो साथ छोड़ गए।
जब दोनों हाथ फैलाए आसमान था,
तभी वो हमें तन्हा छोड़ गए।
उनके छोड़ने के ग़म में हम
इस आसमान में उड़ना ही भूल गए।
कुछ इस कदर मिला धोखा कि,
ख़ुद ही ख़ुद को अंदर से मारते गए,
और इस सब के बीच,
हम सारा ज़माना भूल गए।”**