Hindi Quote in Thought by VIRENDER VEER MEHTA

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#दूसरों_द्वारा_डाली_गई_मिट्टी_से_दफ़न_नहीं_होना_है
. . . ओशो की कलम से।

एक बार किसी गाँव में एक किसान का बैल एक सूखे कुएँ में गिर गया। बहुत देर तक वह बैल वहाँ पड़ा चिल्लाता रहा, लेकिन किसान ने कोई कदम नहीं उठाया। किसान उसकी चिल्लाहट सुनता रहा और सोचता रहा कि वह क्या करे और क्या नहीं ?
अंततः किसान ने विचार किया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चुका है और वह उसके लिए अनुपयोगी है, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं है इसलिए बैल को इसी सुखे कुएँ में दफ़न कर देना चाहिए। किसान ने अपने कुछ परिचितों को बुलाया और उन सब के साथ मिलकर एक-एक फावड़ा मिट्टी कुएं में डालनी शुरू कर दी।
बैल का रूदन अभी तक जारी था, लेकिन जल्दी ही उसे स्थिति का आभास हो गया। और उसके बाद वह अचानक आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। कुछ देर उसकी आवाज न सुनाई देने पर जब उन लोगों ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गए।. . .
अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था, वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर नीचे गिरी मिट्टी पर चढ़ कर उस पर खड़ा हो जाता था। बरहाल जैसे-जैसे वे लोग उस बैल पर फावड़ों से मिट्टी गिराते गए, वैसे-वैसे वह हिलहिल कर उस मिट्टी को गिरा कर; उसकी एक सीढी सी बनाकर ऊपर चढ़ता गया और जल्दी ही आश्चर्यजनक ढंग से वह ऊपर तक पहुंच गया और अंततः बाहर कूदकर भाग गया।

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दरअसल हमारे जीवन का सच भी यही है; जिनके लिए हम उपयोगी नहीं होते, वे हमारे जीवन में बहुत तरह की मिट्टी फेंकतें हैं। हमें आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में हमारी आलोचना करता है, कोई हमारी सफलताओं से ईर्ष्या के कारण बेकार में ही भला बुरा कहता है, कोई हमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता है जो हमारे आदर्शों के विरुद्ध होते हैं। ये सब एक तरह से फेंकी हुई मिट्टी ही है।
ध्यान रहे. . . ऐसे में हमें हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की मिट्टी को गिराकर उससे सीख ले कर; उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किए आगे बढ़ना है।
. . . V€€R 💝

Hindi Thought by VIRENDER  VEER  MEHTA : 112013280
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