**मैं जो मोहब्बत न करने का ज्ञान
सबको देता फिरता हूँ,
कभी तन्हाई में मिलो—
बताऊँगा उसने बिना कुछ कहे
कैसे रिश्ते ख़त्म कर दिए।
फिर भी उसे अपना यार कहता हूँ मैं,
एक है जिसके बारे में
किसी को कुछ बताता नहीं,
बस नज़रों में बसाए फिरता हूँ।
कुछ ख़ास नहीं अब…
दुनिया के लिए उसे
सिर्फ़ दोस्त बना रखा है,
पर दिल आज भी
उसी से लगाए फिरता हूँ