गांधी तेरे देश में यह क्या हो रहा है,
धीरे धीरे आज़ादी का मतलब बदल रहा है,
धर्म और मजहब इक दूसरे से जुदा हो रहा है ,
हर इंसान खुद ही ख़ुदा बन रहा है,
धनवान सुख कि आश में मर रहा है,
और ग़रीब प्यासा मर रहा है ,
इक तरफ साक्षरता अभियान चल रहा है ,
दूजी और ग्यान महँगा हो रहा है,
कोई बंधनो से तंग होता जा रहा है ,
कोई अकेलेपन का शिकार हो रहा है ,
देश विदेश में भारत का नाम हो रहा है,
अंदर ही अंदर मगर देश घुट रहा है ,
गांधी तेरे देश में यह क्या हो रहा है ,
गांधी तेरे देश में यह क्या हो रहा है ,
गांधी तेरे