जिंदगी तू कुछ ना कुछ
सबको दे जाती है।
कहीं खुशी तो कहीं गम
कहीं आंसू तो कहीं मुस्कान
कहीं प्यार तो कहीं तकरार
जिंदगी तू क्या नहीं दे जाती है
कहीं टूटी खुशियाँ, टूटे रिश्तों का हार
कहीं छत तो कहीं खुला आसमान
कहीं सूखे का अकाल तो कहीं बारिश की बौछार
जिंदगी क्या नहीं देती है तू
कहीं किसी को जिंदगी देती है तू
तो कहीं किसी की जिंदगी अपने साथ ले जाती है तू
कोई तुझसे सीखता है तो कोई
तुझसे दूर भागने की कोशिश करता है
लेकिन कहाँ तुझे कोई दूर भाग पाता है
जिंदगी क्या नहीं देती है तू
माँ-बाप जैसा अनमोल
रिश्ता दे जाती है तू
दोस्ती जैसा खट्टा-मीठा रिश्ता
दे जाती है तू
कहीं किसी को खुद में
समेट कर चैन की नींद सुलाती है तू