वक्त गम दे गया जमाने भर का
फरिश्ते रास्ता भुल गये मेरे घर का
खुदा की महोब्बत में तुने राह के काँटे सब तो हटा दिये
मगर लुत्फ खत्म कर दिया मेरे सफर का
मेरे आँसुओं की कीमत बता जो तेरी चाह में बहाये मैंने
हाथों में रखकर चलें गये वो प्याला जहर का
जिंदगीभर के लिए मदहोश कर दो हमें
जाम पिला भी दो न अपनी नजर का
कलम थक चुकी है, और क्या लिखूँ
फसाना लिख सका हूँ अपना बस पल भर का