शीर्षक: आँखों की मस्तियाँ
गीतकार: विकाश विप्लव
देखी जो तेरी...
देखी जो तेरी आँखों की मस्तियाँ,
खोया दिल ये मेरा...
खोया दिल ये मेरा, ना रहीं इसकी हस्तियाँ,
देखी जो तेरी आँखों की मस्तियाँ।
छाया तेरे इश्क़ का मुझपे कैसा ये नशा,
हर घड़ी ढूँढूँ तुझे, ढूँढूँ बस तेरा पता,
दिल को ना चैन मेरे, ना क़रार का निशाँ,
तन्हा-तन्हा बीते दिन, तन्हा बीतीं रतियाँ,
देखी जो तेरी आँखों की मस्तियाँ।
बस गए हो जब से तुम धड़कनों में मेरी,
डूबे रहते हैं हर पल हम ख़यालों में तेरे,
मिलना हमारा मुक़द्दर होगा भी कि नहीं,
तू ही आके उलझन ये सुलझा दे साथिया,
देखी जो तेरी आँखों की मस्तियाँ।
ज़िक्र तेरा ही सजता है अब हर महफ़िल में मेरी,
सुलझा करता हूँ रात-दिन उलझनें मैं तेरी,
है मोहब्बत कितनी, कितनी चाहत है मेरी,
देख आँखों में मेरी, अपनी तस्वीर बेलिया,
देखी जो तेरी आँखों की मस्तियाँ...
खोया दिल ये मेरा, ना रहीं इसकी हस्तियाँ।