"न'अश-ए-अरमाँ"
न'अश-ए-अरमाँ निकलने से पहले,
काश वो लौट आते सूरज ढलने से पहले।
ये हश्र-ए-दिल न होता, ये तबाही न होती,
गर कतरा सोच लेता समंदर में मिलने से पहले।
वो हर इक मंज़र याद आ जाता है मुझको,
दिल में कोई नया अरमाँ मचलने से पहले।
बहुत ख़ूबसूरत हुआ करता था यारों,
मिरा मकाँ भी जलने से पहले।
कलम ने थाम लिया डूबती साँसों का सफ़र,
हम ख़ाक हो चुके थे संभलने से पहले।
कौन सुनता मिरे अहवाल-ए-परेशाँ को "कीर्ति",
दर्द ग़ज़लों में ढला लब से निकलने से पहले।