दिनभर की भाग-दौड़ थमी, अब रात का साया लहराया है,
चंदा मामा ने अंबर पर, अपना डेरा चमकाया है।छोड़ो अब कल की चिंता को, पलकों में सपने बुनने दो,
धीमे-धीमे बहती हवा को, मन की बातें सुनने दो।
थक गई हैं आँखें, थक गया है तन,अब शांत करो तुम अपना मन।
बिस्तर ने तुमको बाहों में समेटा,नींद की वादियों ने तुम्हें बुलाया।
खो जाओ मीठे सपनों में, जहाँ खुशियों का संसार है,
सो जाओ अब चुपके से, कल फिर एक नया सवेरा तैयार है।