सोचने लगी—क्या सोचते हैं लोग हमारे बारे में?
कि लोग समझेंगे कि हम अच्छे हैं,
पर यही हमारी गलती होती है।
हम उनसे बहुत उम्मीद पाल लेते हैं,
उन्हें समझाने में अपना समय गँवा देते हैं।
पर अब सोचने लगी हूँ—
जिन्हें सोचना है, उन्हें सोचने दो,
सोचना हमारा काम नहीं है।
यह भी तो जरूरी नहीं
कि हम हर किसी की नजरों में अच्छे लगें।
जरूरी यह है कि
हम अपनी नजरों में सही रहें।