आजादी के 80 साल बीते 80 सालों में बहुत कुछ बदला है हमारा देश आगे बढ़ा सफलताएं हासिल की दुनिया में कई कीर्तिमान दर्ज किए आज भी इस देश के सामने कई मुश्किलें हैं संघर्ष अभी भी है लेकिन जरा एक पल रुक कर सोचिए उन लोगों ने जिन्होंने हमारे लिए आजादी की लड़ाई लड़ी क्या उनका इसमें अपना कोई स्वार्थ था सवाल ही नहीं उठाता है क्योंकि आज जो भी लोग हमारे सामने हैं जो भी हमारा देश चला रहे हैं वह नेता है और जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया वह देशभक्त थे उनमें से कितनों का नाम तो अभी तक किताबों में भी नहीं आया है क्योंकि हमें कभी सही इतिहास पढ़ाया ही नहीं गया अगर वह लोग भी अपने परिवार और अपने हिस्से के बारे में सोच कर बैठ जाते तो शायद हम आज भी गुलाम ही होते इस बात से अंतर नहीं पड़ता कि आप किस पार्टी को सपोर्ट कर रहे हैं बीजेपी या कांग्रेस कोई भी पार्टी हो लेकिन सच यही है कि जिन्होंने इस देश के लिए बलिदान दिया वह देशभक्त थे और जो आज हमारा देश चला रहे हैं वह नेता है उनके दिए हुए बलिदान को याद कीजिए याद कीजिए कि आप जो आराम की जिंदगी आज की रहे हैं उसके लिए पता नहीं कितने लोगों ने काले पानी की सजा झेली होगी कितने लोग फांसी पर चढ़े होंगे मुझे ऐसा लगता है कि अगर आज जैसी सोच वाले लोग उसे समय होते तो शायद हमारा देश कभी आजाद नहीं होता मुझे नहीं लगता कि हमारे देश में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जैसा कोई है जिनका जीवन तो जीवन मृत्यु भी एक पहेली बन गई इस देश के लिए और आज भी इस देश को उनके बारे में नहीं पता कि उनकी मौत आखिर हुई कैसे थी और मेरा सवाल यही है कब तक हमें असली इतिहास नहीं पढ़ाया जाएगा वह लोग जिन्होंने इस देश के लिए सच में कुर्बानी दी उनका इतिहास कहां है क्यों आज भी किसी किताब में इन चीजों के बारे में खुलकर नहीं पढ़ाया जाता स्कूलों में आज भी कोई ऐसी किताब क्यों नहीं दी जाती जिसमें पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप के बारे में कोई सटीक और प्रमाणिक जानकारी हो मुझे नहीं लगता कि स्कूलों में इतिहास की किताब में यह सब पढ़ाया जाता है लेकिन यह सब पढ़ाया जाना चाहिए हमारे देश की आने वाली पीढ़ी को यह पता होना चाहिए की आजादी के पीछे कितना लंबा संघर्ष है