राहों का सफ़र
कभी धूप का साया, कभी छाँव की बात है,
ये ज़िंदगी तो बस एक छोटा सा साथ है।
हर मोड़ पर मिलते हैं नए-नए चेहरे यहाँ,
हर राह में छिपी एक नई शुरुआत है।
गिर कर सँभलना ही तो असली हुनर है,
मंज़िल से हसीं तो सफ़र की ये रात है।
"मुस्कुराते रहिए हर हाल में यहाँ, ग़मों की क्या औक़ात, जो रोक ले कारवाँ।"❤️