जब आप बाहर किसी से लड़ते हैं तो लोग आपको देखते हैं जब आपको चोट लगती है तो खून बहता है लेकिन जब आप अपने मन से या कहे खुद से ही लड़ रहे होते हैं जब आपका मन टूट रहा होता है तो कोई आपको देख नहीं रहा होता तब आपका कोई खून नहीं बहता लेकिन धीरे-धीरे जीवन जीने की चाहत कम हो जाती है और अगर कोई आपके साथ है भी तो यह संभव है कि वह आपके इमोशंस को सही से समझ ही ना पाए कभी इसीलिए सबसे जरूरी यह है कि आप खुद अपने इमोशंस को समझिए क्योंकि अगर आपने खुद को समझ लिया तो फिर आप कुछ भी कर सकते हैं फिर आपको किसी का इंतजार नहीं रहेगा अगर ऐसा हो जाता है तो फिर कितना भी बड़ा फैसला हो लेने में आसानी ही होती है इसलिए सबसे जरूरी खुद को समझना है क्योंकि बहुत सारी बातें ऐसी होती है जिन्हें आप कितना भी बोल कर समझा नहीं सकते हैं तो सबसे जरूरी यह है कि आप खुद के साथ हैं या नहीं आप खुद को समझ पा रहे हैं या नहीं