*कविता*
*"मेरे महाकाल की कृपा बरस रही है"*
मेरे महाकाल की कृपा बरस रही है
मन शांत होने लगा, बेचैनी पिघल रही है
सावन में हर जगह गूंज भोले की हो रही है
कण-कण महक रहा धरती का
प्रकृति नव श्रृंगार कर रही है
बिन मांगे सब देते महादेव
मेरी आस्था दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है
दूर हुए दोगले रिश्ते, आंख मेरी खुल रही है
जब से लिया भोले ने शरण अपनी
मेरी हस्ती नित चमक रही है
मेरे महाकाल की कृपा बरस रही है
अब कुछ और ना मुझको भाए
रटूं सारे दिन ॐ नमः शिवाय
तेरा नाम ना मुझसे बिसरे भोले
भले ही ये दुनिया मुझसे रूठ रही है
पकड़ा है हाथ तुमने जबसे
चिन्ता हो गई दूर सब, नई ज्योति चमक रही है
गिरने ना दिया बाबा तुमने
हर मोड़ पर मुझको संभाल लिया है
देख भोले का चमत्कार,
ये दुनिया मुझसे जल रही है
महाकाल की बेटी हूं, शिव मेरे आराध्य
कृपा से उनकी जिंदगी बढ़िया गुजर रही है
मेरे महाकाल की कृपा बरस रही है।
// जय महाकाल //
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली