हमारा समाज
समाज हमारा आईना है,
इसमें हर इंसान दिखाई देता है।
कोई दुख में साथ निभाता है,
कोई बस अपना फायदा देखता है।
जहां कभी प्यार की बातें होती थीं,
आज वहां दूरी बढ़ जाती है।
छोटी-छोटी बातों पर अक्सर,
इंसानियत पीछे छूट जाती है।
गरीब की मेहनत को सम्मान मिले,
हर बेटी को आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
जाति-भेद की दीवारें टूटें,
हर दिल में प्यार का संसार मिले।
बदलाव की शुरुआत खुद से करें,
अच्छे कर्मों की राह चुनें।
समाज तभी महान बनेगा,
जब हम मिलकर इंसान बनें।
"इंसान की पहचान उसके नाम से नहीं,
उसके अच्छे काम से होती है।"
रचयिता : "संदीप बिन्द "