ज़िंदगी
बहुत कुछ सिखाती है ज़िंदगी,
हर पल नए रंग दिखाती है ज़िंदगी।
कुछ लोग आते हैं सबक़ बनकर,
तो कुछ मरहम बनकर।
कुछ थाम लेते हैं लड़खड़ाते क़दम,
तो कुछ गिरकर संभलना सिखा जाते हैं।
हर रिश्ता उम्रभर साथ निभाए,
ये ज़रूरी तो नहीं।
हर मुलाक़ात मंज़िल तक पहुँचा दे,
ये भी ज़रूरी तो नहीं।
कुछ लोग बस इतना ही करने आते हैं—
कि हमें हमारी असली पहचान करा जाएँ।
आख़िर में समझ यही आती है,
ज़िंदगी लोगों से नहीं,
उनसे मिली सीख से ख़ूबसूरत बनती है।
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