उपाय यानी कि Remedies पर प्रश्न।
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*प्रश्न : दान की महिमा क्या है? वास्तव में ग्रहों के दान से भाग्य बदलता है?
उत्तर : दान और कर दोनों ही जीवन और समाज की उन्नति के लिए आवश्यक है। कर सुविधाओं का सृजन करता है और दान वंचित वर्ग के लिए आपूर्ति करता है।
दान और ग्रहों का सीधा कोई संबंध नहीं है परन्तु धान्य और खाद्य पदार्थों को ग्रहों के साथ जोड़ा गया है। और उसी से ग्रहों के लिए दान का पारंपरिक लोकवाद प्रारंभ हुआ।
यज्ञ यानी सामूहिक उन्नति के लिए किया जाने वाला पुरुषार्थ, तप यानी सामूहिक उन्नति के लिए सार्थक योग्यता प्राप्त करने का परिश्रम और अभ्यास। और तप और यज्ञ से दान उत्पन्न होता है। जैसे एक योद्धा सैनिक देश की सेवा के लिए ट्रेनिंग प्राप्त करता है,वह उसका तप है। फिर वह अपनी पूरी ताकत से देश की सरहदों की रक्षा करता है वह उसका यज्ञ है। और जरूरत पड़ने पर वह शत्रुओं का विनाश करता है ,कभी कभी खुद की जान खतरे में डाल कर बलिदान करता है यह उसका दान है, दूसरों के हित के लिए कुछ भी निस्वार्थ भाव से देना या समर्पित करना दान है।
भौतिक वस्तुओं का, समय का, ज्ञान का ,सहायता का ,दान बहुत प्रकार का होता है। इसी दान से समाज और कुदरत का चक्र संतुलित है।
पशु पक्षियों की सेवा , चींटीओ की सेवा भी दान की श्रेणी में आता है। योग्य व्यक्ति को दिया जानेवाला दान जीवन रक्षक और पोषक है। प्रसन्नता और सुकून में वृद्धि करने वाला स्वाभाव, विचार और जीवन ऊर्जा को सुख ,शांति प्रदान करने वाला और पीड़ा का शमन करने वाला भी है, कभी कभी यह दान आपके प्रभाव और प्रतिष्ठा में वृद्धि भी करता है और यश भी प्राप्त होता है इसी लिए ग्रहों की पीड़ा के निवारण हेतु दान का विशेष महत्व है।