मैं और मेरे अह्सास
मेहंदी
हौसलों की मेहंदी सजाए जीने की शुरुआत कर रहे हैं l
महफिल में पहली बार ही पीने की शुरुआत कर रहे हैं ll
किसीको को तो पहल करनी पड़ेगी तो आज ख़ुद ही l
कच्चे रिस्तों को फ़िर से सीने की शुरुआत कर रहे हैं ll
हुस्न वालों का दिल बहलाने के लिए मस्ती भरे लम्हों में l
खुली फिजाओ में नशीले गाने की शुरुआत कर रहे हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह