यादें, बस यादें
यादें रह जाती हैं
यादें, बस यादें रह जाती हैं
बातें बस बातें याद आती हैं
वो कॉलेज की यादें
शरारती बातें, चाँदनी रातें
वो मैम से आगे बैठने की जिद
कोई और ना आए फर्स्ट
कैसी थी वो जलन कैसी जिद
कैंटीन की मस्ती, चाय थी सस्ती
दो रुपए का समोसा, चटनी
दस के आते छोले भटूरे
सबके जन्मदिन मनाते वहीं
याद आती है वो मैम की शाबासी
पढ़ते-पढ़ते आती थी उबासी
सभा में एक पंक्ति में लगना
याद न हो फिर भी गाना
बेसुरा ही सही पर जरूर गाना
छुट्टी की बजते ही घंटी
याद आती मम्मी और खाना
वो रातों को जागना, रटना
सुबह खुलती नहीं थी आँखें
सात बजते ही कॉलेज को भागना
चलते-चलते ही नाश्ता खाना
कितना अच्छा था वो जमाना
वो रोज स्कूल जाना
---डॉ वंदना शर्मा