पहाड़ कितना ऊँचा होता है
तब पता चला
जब उस पर चढ़ने लगा।
पहाड़ कितना ठंडा होता है
तब पता चला
जब वहाँ रहने लगा।
पहाड़ कितना पवित्र होता है
तब पता चला
जब वहाँ नदी को देखा।
पहाड़ कितना श्वेत होता है
तब पता चला
जब हिमालय को निहारा।
पहाड़ कितना सुहावना होता है
तब पता चला
जब वहाँ चिड़ियों की चहचहाहट सुना।
*** महेश रौतेला