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*शीर्षक: बुरा आपा/बुढ़ापा
*- डॉ वंदना शर्मा*
जब साथ ना दे कोई अपना
जब साथ ना दे शरीर अपना
जब लगे हाथ काँपने
जब लगे पाँव डगमगाने
जब दाँत गायब हो जाएँ मुँह से
जब नजर लगे धुँधलाने
जब अपने भी कर दें बेगाना
वो दौर बहुत रुलाता है
हाय बुढ़ापा बहुत सताता है
जब याद कुछ नहीं रहता है
जब शरीर की सुध नहीं रहती है
जब बच्चे आँख दिखाते हैं
जब रिश्ते नजर चुराते हैं
जब जग बैरी हो जाता है
जब अकेलापन बहुत सताता है
जब पैसा काम नहीं आता है
वो दौर बहुत रुलाता है
हाय बुढ़ापा बहुत सताता है
बुढ़ापा जब बन जाए बुरा आपा
ऐसी जिंदगी से मन भी भर जाता है
वो दौर बहुत रुलाता है
हाय बुढ़ापा बहुत सताता है।
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डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi