मेरी आने वाली किताब की कुछ lines
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अस्सी घाट पर रात और गहरी हो चुकी थी।
कुछ दूर एक नाव वाला अपनी नाव बाँध रहा था।
अक्षरा ने मेरी तरफ़ देखा।
"एक बात पूछूँ?"
"पूछो।"
"अगर उस समय कोई तुमसे पूछता कि तुम्हारी सबसे बड़ी खुशी क्या है, तो क्या जवाब देते?"
मैं बिना सोचे बोला—
"उसका एक बार दिख जाना।"
अक्षरा ने सिर झुका लिया।
धीरे से बोली—
"और आज?"
मैं हँसा नहीं।
"आज… किसी का इंतज़ार नहीं करता।"