प्रेमकविता : प्यार का सफर |
बहुत लंबा सफर किया है मैंने,
तुझे यादों से मिटाने के लिए,
काश मैं भूल जाऊँ तुझे,
पर पागल मैं थी तुझमें की
ये दिल का मामला है,
मिटाने से मिटता नहीं, और जोड़ने से जुड़ता नहीं,
फिर सोचा दिल का इलाज किया जाए,
तुझे दिया हुआ दिल का हिस्सा
खुद से जुदा कर दिया जाए,
और आधा दिल देके तुझे मैं,
खुद को खुद के दिल से तोड़ दूँ,
और ये लंबा सफर मैं यहीं रोक दूँ |