29/11/2025
गिंकगो: एक प्रेम कविता
गुआनयिन के प्रांगण में
एक सोने-सा पेड़ है खड़ा,
चुपचाप सुनता आया है
समय का हर फ़साना।
जब शरद की पहली हवा
पत्तों को छूकर जाती,
सोने-सी झिलमिल रोशनी में
डालें सदियों के गीत सुनती हैं!
तांग सम्राट ली शिमिन ने
स्वयं लगाया था इस पेड़ को
रानी झांगसुन के प्रति कृतज्ञता के लिए।
तेरहवें वर्ष में आई थी रानी
सत्रह बरस का था राजकुँवर—
राजपथ कठिन, बादल भारी,
बस कृतज्ञता ही उनकी प्रेम कहानी।
रानी थी जैसे मंद हिमालय,
वाणी धीमी, दृष्टि सहज,
उसकी बुद्धि, उसकी शांति,
आज भी साम्राज्य उसके गीत गाय।
शब्द कम, पर साथ गहरा—
यही था उनका प्रेम,
न दिखावा, न किंवदंती कोई,
बस सम्मान और कृतज्ञता का प्रेम।
आज भी जब नवंबर आए,
पत्ते सोना बरसाएँ,
जैसे प्राचीन प्रेम का दीपक
रातभर फिर से उजाला लाए।
चौदह सौ वर्ष से यह पेड़
उस प्रेम का साक्षी है,
हर गिरता पत्ता उस
कहानी को सुनाता है।
डालों पर समय ठहरा-सा,
पत्ते गीत पुराने गाएँ—
"सम्मान और साथ हो जहाँ,
सच्चा प्रेम वहाँ अमर हो जाए।"