‘अतिथि देवो भव:’ का सम्मान हम भी खूब निभाते हैं,
बस देवताओं से एक छोटी-सी प्रार्थना जताते हैं।
अचानक अवतार लेकर घर पर मत आया कीजिए,
पहले एक संदेश देकर कृपा बरसाया कीजिए।
क्योंकि आपके “सरप्राइज़” के चक्कर में हाल ये हो जाता है—
चूल्हा, चौका, काम, आराम… सब भगवान भरोसे सो जाता है।
चेहरे पर मुस्कान सजानी पड़ती है,
और भीतर की टू-डू लिस्ट रोती रह जाती है।
अतिथि बनकर आइए, दिल से स्वागत पाएँगे,
बस थोड़ी सूचना दे दीजिए…
तो हम भी इंसान से सीधे “गृहलक्ष्मी” बन जाएँगे! 😄