नारी को पहले इतना समझा नहीं गया,
उसे बस घर तक ही रखा गया।
पर अब धीरे-धीरे समय बदल रहा है,
और नारी भी आगे बढ़ रहा है।
वो पढ़ना चाहती है, कुछ बनना चाहती है,
अपने दम पर खुद को पहचानना चाहती है।
अब वो सिर्फ घर तक सीमित नहीं है,
उसके सपनों का भी कोई अंत नहीं है।
हर काम में वो अपना हाथ बढ़ाती है,
मुश्किलों से भी नहीं घबराती है।
अगर उसे मौका और साथ मिले,
तो वो हर मंजिल पा सकती है।
कभी वो माँ बनकर सब संभालती है,
कभी बेटी बनकर घर सजाती है,
कभी बहन बनकर साथ निभाती है,
हर रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाती है।
आज वो स्कूल भी जाती है,
अपने सपनों को सजाती है,
कल वही आगे बढ़कर
देश का नाम भी रोशन करती है।
उसे बस थोड़ा सा भरोसा चाहिए,
और आगे बढ़ने का मौका चाहिए,
फिर देखना वो कैसे
हर मुश्किल को आसान बना देती है।
अब नारी चुप नहीं रहती,
वो अपने हक के लिए बोलती है,
गलत को गलत कहने की
हिम्मत भी अब रखती है।
नारी जब आगे बढ़ेगी,
तभी तो देश भी आगे बढ़ेगा।
उसकी मेहनत और हिम्मत से ही
भारत सच में समृद्ध बनेगा।
नारी है तो हर सपना साकार है,
उसी से हर घर-आंगन में प्यार है,
उसका सम्मान ही सबसे बड़ा धन है,
इसी से मजबूत अपना हिंदुस्तान है।