निष्कलंक अम्लान
जो समय की आँच में झुलसे नहीं, वो प्राण 'अम्लान' है,
जो विपद के सिंधु में डूबे नहीं, वो शौर्य का गान है।
शृंगार में जो फूल बन महके, समर में वज्र हो,
मिट कर भी जो मिटा न पाए, वही अमिट पहचान है॥
जहाँ सत्य की दलीलें हों, न कोई शब्द म्लान हो,
जहाँ न्याय की मशाल जलती, शुद्ध अंतर्मान हो।
कलम और कानून का जो, मेल लेकर चल रहा,
वही 'आशीष' है जग में, जो सदा 'अम्लान' है॥
कोई इसे बचपन की निष्कलंक मुसकान कहता है,
कोई इसे तपती दुपहरी में घना सायेबान कहता है।
मगर जो द्वंद्व की मरुधार में भी, म्लान होता नहीं,
मेरा मन उसी को 'अम्लान' हिंदुस्थान कहता है॥
Adv. आशीष जैन
7055301422
फिरोजाबाद