“हे प्रभु, तेरे कितने नाम, तेरे कितने धाम,
हर दिशा में बस तेरा ही रूप तमाम।
तुझे पाएँ तो कैसे, ये राह समझ न आए,
तुझे बोलें तो कैसे, आवाज़ भी तुझ तक न जाए।
ये दुनिया एक मेला है, कौन सा तेरा रूप सच्चा, कौन सा निराला है,
दुविधा में हूँ प्रभु, कहीं गलत राह न पकड़ लूँ मैं।
- Nisha ankahi