Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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दोहा - राम नवमी

आज अवध में बह रही, खुशियों भरी बयार।
रामराज्य की नींव का, रामलला आधार।।

चैत्र मास नवमी तिथी, जन्म लिए श्री राम।
हर्षित सारा अवध है, आए ललित ललाम।।

रामजन्म से छा गईं, खुशियाँ अपरम्पार।
नर -नारी हर्षित बड़े, झूम उठा संसार।।

अद्भुत रुप निहारिए, बालक खासमखास।
नजर नहीं है हट रही, प्रमुदित मन उल्लास।।

राम रूप में आ गए, श्री हरि ले अवतार।
उम्मीदें सबकी बढ़ीं, निश्चित जग उद्धार।।

रूप राम का देखकर, हटती नहीं निगाह।
वाह-वाह वाणी कहे, मन में बड़ा उछाह।।

ऋषि-मुनि-ज्ञानी आ गए, आज अवध के धाम।
दरश हृदय की लालसा, सरयू संगम राम।।

धरा अवध पावन हुई, बनी अयोध्या धाम।
जन्म जहाँ पर हैं लिए, रघुकुल नंदन राम।।

मानव रूपी राम जी, जग के तारणहार।
उम्मीदों का आइना, देख रहा संसार।।

सूर्य तिलक श्री राम का, अद्भुत अनुपम खास।
देख मित्र यमराज के, मन में बड़ा उजास।।

धर्म ध्वजा लहरा रही, देखे जग संसार।
शबरी के श्री राम का, नवरूपी अवतार।।

मर्यादा की मूर्ति ये, मानवता की शान।
त्रेता युग के राम का, अजर-अमर सम्मान।।

सुधीर श्रीवास्तव

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 112020743
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