हर सुबह की तरह सूरज वही था,हवा भी वही थी, आसमान भी वही था,पर पंछी आज कुछ उदास थे,क्योंकि एक बेटी का सपना आज टूटने वाला था।
पापा की इज्जत रखने कोउसने हाथों में मेहंदी सजा ली,जिस बाप ने उम्र भर जोड़ा खजाना,वो भी बेटी के ब्याह में लुटा दी।
सोचा था खुशियों का घर मिलेगा,कोई हमसफर साथ निभाएगा,पर किस्मत ने ऐसा मोड़ दियाजहाँ हर दिन दर्द ही आएगा।
पहला थप्पड़ पड़ा तो चुप रह गई,सोचा गुस्से में होगा, मान लिया,धीरे-धीरे वो जुल्म बढ़ता गयाऔर उसने सब कुछ सहना जान लिया।
दुल्हन बनने का शौक था उसका,पर पल भर में सब बिखर गया,जिसे हमसफर कहने चली थी,वही उसका सबसे बड़ा दर्द बन गया।
यकीन मानो, हर चुना हुआ रिश्ताहमेशा खुशियाँ नहीं लाता,कभी-कभी माँ-बाप का भरोसा भीबेटी की खामोशी में दर्द बन जाता।