21 मार्च विश्व कविता दिवस विशेष
कविता क्या है?
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आज विश्व कविता दिवस पर मित्र यमराज ने
अपना बधाई संदेश भेजा,
मन प्रसन्न हो गया,
होना ही था, क्योंकि आपका बधाई संदेश तो
जाने कहाँ अटका पड़ा है।
खैर! कोई बात नहीं,आप सब मेरी बधाई स्वीकारिए
और कविता क्या है? इस पर मेरा नहीं
मेरे मित्र यमराज का पावन विचार सुनिए।
कविता भाव है, संवेदना है, सच का आइना है
समाज, राष्ट्र की आवाज, मन की पीड़ा है।
कविता आम जन की सोच, अंतर्द्वंद्व, चेतना, करुणा
जरुरत, अभाव, अधिकार, गरिमा है।
कविता कवि से है, ऐसा सोचना सही नहीं है
कवि ही कविता से है, यही सौ प्रतिशत सही है।
कुछ शब्दों को जैसे-तैसे जोड़ कर
तुकबंदी कर कागज पर उतार देना कविता नहीं है।
वास्तव में कविता के शब्द
जब बदलाव की उम्मीद जगाए,
किसी गरीब, असहाय की आवाज बन जाए
अपनी सार्थकता से पहचान बन जाए,
देश, दुनिया, समाज ही नहीं
प्रकृति, पर्यावरण, प्रदूषण, प्राकृतिक असंतुलन भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार से लड़ जाए,
धर्म जाति भाषा की हर दीवार तोड़ दे
युद्ध के बीच शाँति की मीनार बन जाए,
सच्चे अर्थों में तब ही कविता कहलाए।
दुनिया, राष्ट्र, समाज की एकता का सूत्र बन
कविता सिर्फ कविता नहीं, जब इतिहास बन जाए,
कविता सिर्फ कागजों में सिमटकर न रह जाए
अपनी उपस्थिति का भी अहसास कराए,
कविता अपने मौन भावों से छा जाए,
तब ही कविता वास्तव में कविता कहलाए।
कविता कवि की पहचान बन जाए, वो कविता है
कुछ भी कह देने को कविता कह देना ठीक नहीं है,
कवि, कवयित्रियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं
सोच-विचार कर अपनी कलम चलाएं
कविता को कविता की वास्तविक पहचान दिलाएं,
तब आज विश्व कविता दिवस मनाएं,
अपनी कविता मुझे न सही मेरे मित्र को तो सुनाएं।
सुधीर श्रीवास्तव