फायकू
अब जीना बेकार है
समझ में आया
तुम्हारे लिए।
पावन भाव लिए वो
आगे बढ़ता रहा
तुम्हारे लिए।
बेकार है शिकवा-शिकायत
समझना नहीं जब
तुम्हारे लिए।
बंद करो विधवा विलाप
खोखला है सब
तुम्हारे लिए।
कैसे कह दूँ तुमसे
दूर नहीं जाना
तुम्हारे लिए।
हार-जीत तो खेल है
समझ लिया हमने
तुम्हारे लिए।
विश्वास तोड़ दिया मैंने
रोना बेकार है
तुम्हारे लिए।
जीवन की डोर बनी
व्यर्थ रुलाती है
तुम्हारे लिए।
ईश्वर से आस है
पूरा विश्वास है
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव