शायद ही ऐसा कोई घर हो ,जहां बेटियों के जन्म पर खुशियां मनायी जाती हों,पर जैसे जैसे वो बड़ी होती है उसकी मुस्कान घर आंगन में बिखरती है उस सुने से अंगना में शहनाई सी बज जाती है, घर में जब माँ का हाथ बटाती है,जन्म के समय वो दर्द के आशु भी पोंछ जाती है,पापा की सिर मालिश से वो दिनभर का टेंशन दूर भगाती है ,जन्म के समय मिले वो जीवनभर की मानसिक तनाव को वो कम कर जाती है, एक दिन ऐसे ही वो मेरे कुल का भी नाम बनायेगी, नहीं खलेगी कमी बेटे की मेरी बेटी ही कुछ ऐसा कर जाएगी