कैसे दिन बीत गए, कैसे हम अजनबी हो गए,
जो कभी पास थे दिल के, आज दूर सभी हो गए।
तुम कहते थे — साथ निभाएँगे हर हाल में,
देखो वक़्त के साथ वो वादे भी खो गए।
रास्ते एक थे, मंज़िल भी वही थी कभी,
फिर न जाने क्यों कदम अचानक जुदा हो गए।
याद हैं वो रातें, वो त्योहार, वो हँसी,
दो जिस्म एक जान थे, और अब जुदा हो गए।
तुम्हें देखकर लगता है भूल गए हो मुझे,
या याद रखकर भी खामोश खड़े हो गए।
हाँ… शायद किस्मत को यही मंज़ूर था,
जो जान थे कभी, आज अजनबी हो गए।
_ A Singh ✨