रॉंह....
राह पर चलते चलते
कुछ अजनबी हसीन मिल गए......
ठोकर खाकर भी आगे थे
ऐसे भी कुछ नकाब मिल गए....
सोचा,की खैर अब आया ही हूँ
तो आगे निकल जाऊ.....
तरह तरह के लोग होते है दुनिया में..
उनसे थोड़ा अब मुकर ही जाऊ....
सवाल उठा था मन में,
मैं तो आगे जाने वाल था.....?
तभी कोई फंदा गले में आके फंसा..
वरना जवाब को छूकर बस लौटने ही वाल था.....
कुदरत ने भी क्या खेल रचा,
जैसे मौत के कुएं से लौट बचा....
मंजिल की तलाश में थे हम,
रास्ता तो हमारे लिए अपने आप सजा......!