मैं और मेरे अह्सास
इश्क़ की आग में जले हुए
इश्क़ की आग में जले हुए को फ़िर से जलाया नहीं करते l
मोहब्बत में चोट खाए हुए का सरे आम तमाशा नहीं करते ll
दिल की क़ायनात में बसाया और रग रग में बसाया ओ l
प्यार में ख़ुद को मिटाया दिया हो उसे भुलाया नहीं करते ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह