राधा पर चढ़ गया कान्हा का रंग
विवेक रंजन श्रीवास्तव
बाँसुरी बज उठी, बाजे मृदंग
ब्रज खेले होली, बावरा है ढंग
उड़ता गुलाल , खुले अंग
प्रत्यंग
राधा पर चढ़ गया कान्हा का रंग
पिचकारी बरसाएं मन की
उमंग
राधा पकड़े बहियाँ कान्हा
प्रतिबंध
आह्लादित है कुंज कुंज
राधा पर चढ़ गया कान्हा का रंग
माखन को छोड़ आज
छानी है भंग
देख देख रंगढंग ये
दुनिया है दंग
छिडी हुई ग्वालों की गोपियो से जंग
राधा पर चढ़ गया कान्हा का रंग
होरियारे गाएं फाग मल मल गुलाल
तन मन है उल्लासित
मिट गये मलाल
हवा में घुल रहे प्रेम के प्रसंग
राधा पर चढ़ गया कान्हा का रंग
टेसू के रंग रचे राधा के अंग
राधा की चितवन इंद्र धनुष तंग
हर कुछ है जायज होली हुड़दंग
राधा पर चढ़ गया कान्हा का रंग
विवेक रंजन श्रीवास्तव