मैं और मेरे अह्सास
मयख़ाने में जाने वाला हर शख़्स शराबी नहीं होता हैं l
मस्जिद में जाने वाला हर शख़्स नमाज़ी नहीं होता हैं ll
दो चार लम्हें यार दोस्तों के साथ दिल को बहला ने l
महफिल मे जाने वाला हर शख़्स अय्याशी नहीं होता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह